गोरा बच्चा होने पर पिता को हुआ शक, ससुराल में हुई घटना से पूरा परिवार सदमे में – कटिहार का मामला

Last Updated: November 22, 2025

1 Min Read

Share

कटिहार, बिहार: कटिहार जिले के अबादपुर थाना क्षेत्र के नारायणपुर गांव से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया है। यहां एक तीन महीने के बच्चे के गोरा रंग होने को लेकर पिता को शक हुआ, और इसी शक ने एक पूरे परिवार की खुशियों को पलभर में खत्म कर दिया।

मामला कैसे शुरू हुआ?

आजमनगर थाना क्षेत्र के जलकी गांव के रहने वाले सुकुमार दास और मौसमी दास की शादी को कुछ ही साल हुए थे। दोनों का एक बेटा पहले से था। कुछ महीने पहले परिवार में एक और बेटा पैदा हुआ—लेकिन बच्चे का रंग गोरा था, जबकि परिवार में किसी का रंग इतना गोरा नहीं था। इसी वजह से सुकुमार को बच्चे पर शक होने लगा। समाज के कुछ लोगों ने भी ताने मारने शुरू कर दिए—“अरे तू तो सांवला है, तेरे घर इतना गोरा बच्चा कैसे?” और इन बातों ने सुकुमार के मन में शक को और मजबूत कर दिया।

लगातार विवाद और तनाव

बताया जाता है कि बच्चे के जन्म के बाद पति-पत्नी के बीच अक्सर विवाद होने लगे।
सुकुमार पत्नी से बार-बार यह पूछता कि बच्चा किसका है। मौसमी बार-बार समझाती कि बच्चा उसी का है, लेकिन सुकुमार मानने को तैयार नहीं था। तनाव बढ़ता गया और आखिरकार मौसमी अपने मायके नारायणपुर चली गई।

घटना वाली रात क्या हुआ?

तीन महीने तक दोनों के बीच यही विवाद चलता रहा। और बुधवार को सुकुमार ससुराल पहुँचा। परिवार वालों ने उसे समझाया कि शक करना गलत है, बच्चे का रंग गोरा होना सामान्य बात है। जिसके बाद सबने खाना खाया, रात में सब सो गए। लेकिन अगली सुबह जब घर वाले उठे, तो उन्होंने देखा कि मौसमी के कमरे का दरवाज़ा खुला है और अंदर बच्चे के रोने की आवाज आ रही है। कमरे में जाकर परिवारवालों ने देखा कि मौसमी को गंभीर चोटें आई थीं और उसकी जान जा चुकी थी। सुकुमार मौके से गायब था। जिसके बाद पूरे परिवार में कोहराम मच गया।

पुलिस की कार्रवाई

वहीं घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची। महिला के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। पुलिस ने सुकुमार दास के खिलाफ मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है। टीमें लगातार संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं।

रंग-रूप को लेकर शक – एक बड़ी सामाजिक समस्या

वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चे का रंग माता-पिता के जीन, पारिवारिक गुणों और प्राकृतिक कारणों पर निर्भर करता है। ऐसी स्थितियाँ बिल्कुल सामान्य होती हैं। लेकिन समाज में आज भी रंग-रूप को लेकर गलत धारणाएँ मौजूद हैं। कई बार मज़ाक और ताने किसी व्यक्ति की मानसिक स्थिति को अस्थिर कर देते हैं।और कटिहार की यह घटना इसी का परिणाम है।