बिहार के हाजीपुर के महनार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पूरे इलाके में आक्रोश फैला दिया है। दअरसल यहां पर इलाज के लिए अस्पताल पहुंची एक घायल महिला ने आरोप लगाया है कि वहां मौजूद डॉक्टर ने उसे राजनीतिक तंज कसते हुए इलाज देने से मना कर दिया। जिसके बाद महिला ने बाहर आकर रोते हुए कहा— डॉक्टर बोले कि जाओ, नीतीश कुमार से इलाज करवाओ। जब वोट नीतीश कुमार को दिया है, तो अब इलाज भी वही करेंगे।
मारपीट में घायल होकर अस्पताल पहुंची महिला
मामला महनार प्रखंड के लावापुर नारायण पंचायत का है। वार्ड नंबर 2 की रहने वाली सुमन देवी मंगलवार (18 नवंबर) को महनार CHC पहुंचीं। महिला ने बताया कि उसके देवर मुकेश पासवान, जो शराब और नशे का आदी है, नशे में घर लौटकर अक्सर उसके साथ मारपीट करता है। घटना वाले दिन भी उसने फिर से मारपीट की, जिसकी वजह से सुमन देवी चोटिल हो गईं और इलाज के लिए अस्पताल पहुंचीं।
तुम्हारा इलाज नीतीश कुमार करेंगे – महिला का आरोप
सुमन देवी का कहना है कि जब वह इमरजेंसी में दाखिल हुईं, तो ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर ने पहले उनकी बात अनसुनी की और फिर इलाज से मना करते हुए राजनीतिक टिप्पणी कर दी।
महिला के शब्दों में—डॉक्टर ने कहा कि हम तुम्हारा इलाज नहीं करेंगे। जाओ नीतीश कुमार से इलाज करवा लो। पैसा एक जात को नहीं, सबको मिला है… इतना कहकर एक सूई लगाकर छुट्टी कर दिया।”
महिला की यह बात कैमरे पर रिकॉर्ड हो गई और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
वीडियो वायरल होते ही हरकत में आया प्रशासन
वीडियो सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र महनार की चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अलका ने कहा है—मामले की जांच की जा रही है। जो भी स्वास्थ्यकर्मी या डॉक्टर दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल अस्पताल प्रशासन ने संबंधित स्टाफ से स्पष्टीकरण मांगा है।
वही इस घटना ने जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों में नाराज़गी पैदा कर दी है। लोग कह रहे हैं कि सरकारी अस्पताल में किसी मरीज से राजनीतिक आधार पर भेदभाव करना बेहद शर्मनाक है। इलाके के कई सामाजिक संगठनों ने भी इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है।
सरकारी अस्पतालों की स्थिति पर फिर उठे सवाल
इस घटना के बाद यह सवाल एक बार फिर चर्चा में है कि क्या सरकारी अस्पतालों में मरीजों के साथ सम्मानजनक व्यवहार होता है? क्या किसी मरीज के वोट या विचार देखने के बाद उसका इलाज तय किया जाएगा? स्वास्थ्य सेवा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इस तरह की राजनीतिक टिप्पणी न सिर्फ असंवेदनशील है,बल्कि कानूनन अपराध भी है।
फिलहाल मामले की जांच जारी है। उम्मीद है कि जांच के बाद सच्चाई सामने आएगी और दोषियों पर सख्त कदम उठाए जाएंगे, ताकि भविष्य में किसी मरीज को ऐसे अपमानजनक व्यवहार का सामना न करना पड़े।





